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mahabharat 12.218.23: कुछ नास्तिक कहते हैं कि शरीर रूपी आत्मा का नाश प्रत्यक्ष देखा जा सकता है। सारा जगत इसका साक्षी है। फिर भी यदि कोई शास्त्र प्रमाण का आश्रय लेकर शरीर से पृथक आत्मा का अस्तित्व प्रतिपादित करता है, तो वह पराजित होता है; क्योंकि उसका कथन लोकानुभव के विरुद्ध है॥23॥   |   mahabharat अध्याय 12.218: राजा जनकके दरबारमें पञ्चशिखका आगमन और उनके द्वारा नास्तिक मतोंके निराकरणपूर्वक शरीरसे भिन्न आत्माकी नित्य सत्ताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 218: राजा जनकके दरबारमें पञ्चशिखका आगमन और उनके द्वारा नास्तिक मतोंके निराकरणपूर्वक शरीरसे भिन्न आत्माकी नित्य सत्ताका प्रतिपादन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.218.23 
दृश्यमाने विनाशे च प्रत्यक्षे लोकसाक्षिके।
आगमात् परमस्तीति ब्रुवन्नपि पराजित:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
कुछ नास्तिक कहते हैं कि शरीर रूपी आत्मा का नाश प्रत्यक्ष देखा जा सकता है। सारा जगत इसका साक्षी है। फिर भी यदि कोई शास्त्र प्रमाण का आश्रय लेकर शरीर से पृथक आत्मा का अस्तित्व प्रतिपादित करता है, तो वह पराजित होता है; क्योंकि उसका कथन लोकानुभव के विरुद्ध है॥23॥
 
Some atheists say that the destruction of the soul in the form of the body can be seen directly. The whole world is witness to this. Even then if someone, taking shelter of scriptural evidence, propounds the existence of the soul separate from the body, then he is defeated; because his statement is against the experience of the people.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)