Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.218.20: तब पंचशिख ऋषि ने राजा को धर्मानुसार अपने चरणों में लेटे हुए देखकर उसे योग्य पुरुष समझा और परम मोक्ष का उपदेश दिया, जिसका वर्णन सांख्यशास्त्र में किया गया है। | mahabharat अध्याय 12.218: राजा जनकके दरबारमें पञ्चशिखका आगमन और उनके द्वारा नास्तिक मतोंके निराकरणपूर्वक शरीरसे भिन्न आत्माकी नित्य सत्ताका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तब पंचशिख ऋषि ने राजा को धर्मानुसार अपने चरणों में लेटे हुए देखकर उसे योग्य पुरुष समझा और परम मोक्ष का उपदेश दिया, जिसका वर्णन सांख्यशास्त्र में किया गया है।
Then the sage Panchasikha, seeing the king lying at his feet in accordance with the Dharma, considered him a worthy person and preached the ultimate salvation, which is described in the Sankhya Shastra.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥