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mahabharat 12.218.2: भीष्म बोले, 'हे राजन! ज्ञानी लोग इस प्राचीन कथा का उल्लेख करते हैं, जिसका अनुसरण करके धर्मात्मा राजा जनक ने महान सुख (मोक्ष) प्राप्त किया था।   |   mahabharat अध्याय 12.218: राजा जनकके दरबारमें पञ्चशिखका आगमन और उनके द्वारा नास्तिक मतोंके निराकरणपूर्वक शरीरसे भिन्न आत्माकी नित्य सत्ताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 218: राजा जनकके दरबारमें पञ्चशिखका आगमन और उनके द्वारा नास्तिक मतोंके निराकरणपूर्वक शरीरसे भिन्न आत्माकी नित्य सत्ताका प्रतिपादन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.218.2 
भीष्म उवाच
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्।
येन वृत्तेन धर्मज्ञ: स जगाम महत्सुखम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, 'हे राजन! ज्ञानी लोग इस प्राचीन कथा का उल्लेख करते हैं, जिसका अनुसरण करके धर्मात्मा राजा जनक ने महान सुख (मोक्ष) प्राप्त किया था।
 
Bhishma said, 'O King! Knowledgeable people refer to this ancient story by following which the righteous King Janaka had attained great happiness (salvation).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)