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mahabharat 12.218.17: भगवान ने मुझे कपिलेय के जन्म की यह कथा सुनाई है। उनके कपिलपुत्र कहलाने और सर्वज्ञ होने की यह सर्वश्रेष्ठ कथा है। ॥17॥   |   mahabharat अध्याय 12.218: राजा जनकके दरबारमें पञ्चशिखका आगमन और उनके द्वारा नास्तिक मतोंके निराकरणपूर्वक शरीरसे भिन्न आत्माकी नित्य सत्ताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 218: राजा जनकके दरबारमें पञ्चशिखका आगमन और उनके द्वारा नास्तिक मतोंके निराकरणपूर्वक शरीरसे भिन्न आत्माकी नित्य सत्ताका प्रतिपादन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.218.17 
एतन्मे भगवानाह कापिलेयस्य सम्भवम्।
तस्य तत् कापिलेयत्वं सर्ववित्त्वमनुत्तमम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
भगवान ने मुझे कपिलेय के जन्म की यह कथा सुनाई है। उनके कपिलपुत्र कहलाने और सर्वज्ञ होने की यह सर्वश्रेष्ठ कथा है। ॥17॥
 
This story of Kapileya's birth was told to me by the Lord. This is the best story of his being called Kapilaputra and being omniscient. ॥17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)