Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.218.15-16: पंचशिख उनका शिष्य था, जो नर-नारी के दूध पर पला था। कपिला नाम की एक ब्राह्मणी थी। उस स्त्री का पुत्र होने के कारण वह उसका दूध पीता था; इसलिए कपिलापुत्र कहलाने के कारण वह कपिलेय नाम से प्रसिद्ध हुआ। उसे स्थिर बुद्धि प्राप्त हो गई थी॥15-16॥ | mahabharat अध्याय 12.218: राजा जनकके दरबारमें पञ्चशिखका आगमन और उनके द्वारा नास्तिक मतोंके निराकरणपूर्वक शरीरसे भिन्न आत्माकी नित्य सत्ताका प्रतिपादन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्य पञ्चशिख: शिष्यो मानुष्या पयसा भृत:।
ब्राह्मणी कपिला नाम काचिदासीत् कुटुम्बिनी॥ १५॥
तस्या: पुत्रत्वमागम्य स्त्रिया: स पिबति स्तनौ।
तत: स कापिलेयत्वं लेभे बुद्धिं च नैष्ठिकीम्॥ १६॥
अनुवाद
पंचशिख उनका शिष्य था, जो नर-नारी के दूध पर पला था। कपिला नाम की एक ब्राह्मणी थी। उस स्त्री का पुत्र होने के कारण वह उसका दूध पीता था; इसलिए कपिलापुत्र कहलाने के कारण वह कपिलेय नाम से प्रसिद्ध हुआ। उसे स्थिर बुद्धि प्राप्त हो गई थी॥15-16॥
Panchsikh was his disciple who was brought up on the milk of a human woman. There was a Brahmin woman named Kapila. Being the son of that woman, he used to drink her breast milk; hence being called Kapila's son, he became famous by the name Kapileya. He had attained the steadfast (devotion to Brahma) intellect.॥15-16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥