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mahabharat 12.217.9: प्रकृति त्रिगुणात्मक है। सकाश से सृष्टि करना ब्रह्मा का स्वाभाविक कर्तव्य है, परंतु क्षेत्रज्ञ या मनुष्य का स्वभाव प्रकृति से सर्वथा विपरीत (अद्वितीय) जानना चाहिए। 9॥   |   mahabharat अध्याय 12.217: सच्चिदानन्दघन परमात्मा, दृश्यवर्ग प्रकृति और पुरुष (जीवात्मा) उन चारोंके ज्ञानसे मुक्तिका कथन तथा परमात्मप्राप्तिके अन्य साधनोंका भी वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 217: सच्चिदानन्दघन परमात्मा, दृश्यवर्ग प्रकृति और पुरुष (जीवात्मा) उन चारोंके ज्ञानसे मुक्तिका कथन तथा परमात्मप्राप्तिके अन्य साधनोंका भी वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.217.9 
प्रकृत्या सर्गधर्मिण्या तथा त्रिगुणधर्मया।
विपरीतमतो विद्यात् क्षेत्रज्ञस्य स्वलक्षणम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
प्रकृति त्रिगुणात्मक है। सकाश से सृष्टि करना ब्रह्मा का स्वाभाविक कर्तव्य है, परंतु क्षेत्रज्ञ या मनुष्य का स्वभाव प्रकृति से सर्वथा विपरीत (अद्वितीय) जानना चाहिए। 9॥
 
Nature is threefold. It is Brahma's natural duty to create from the Sakash, but the nature of the field expert or man should be known to be completely opposite (unique) to nature. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)