Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.217.7-8: प्रकृति और पुरुष (आत्मा) दोनों ही अनादि और अनंत हैं। दोनों ही निराकार और लिंगरहित हैं। दोनों ही नित्य, अचल और महानतम से भी महान हैं। ये सब बातें दोनों में समान रूप से पाई जाती हैं; परन्तु उनमें जो भेद या भेद है, वह कुछ और ही है, जो बताया जाता है॥ 7-8॥ | mahabharat अध्याय 12.217: सच्चिदानन्दघन परमात्मा, दृश्यवर्ग प्रकृति और पुरुष (जीवात्मा) उन चारोंके ज्ञानसे मुक्तिका कथन तथा परमात्मप्राप्तिके अन्य साधनोंका भी वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रकृति और पुरुष (आत्मा) दोनों ही अनादि और अनंत हैं। दोनों ही निराकार और लिंगरहित हैं। दोनों ही नित्य, अचल और महानतम से भी महान हैं। ये सब बातें दोनों में समान रूप से पाई जाती हैं; परन्तु उनमें जो भेद या भेद है, वह कुछ और ही है, जो बताया जाता है॥ 7-8॥
Both nature and man (soul) are eternal and infinite. Both are formless and without any gender. Both are eternal, unshakeable and greater than the greatest. All these things are found in both of them in the same way; but the difference or distinction between them is something else, which is told.॥ 7-8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥