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mahabharat 12.217.37: जो पुरुष प्रकृति, उसके कार्य, आत्मा और सनातन परमात्मा को यथार्थ रूप से जानता है, वह कामनाओं से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त करता है ॥37॥   |   mahabharat अध्याय 12.217: सच्चिदानन्दघन परमात्मा, दृश्यवर्ग प्रकृति और पुरुष (जीवात्मा) उन चारोंके ज्ञानसे मुक्तिका कथन तथा परमात्मप्राप्तिके अन्य साधनोंका भी वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 217: सच्चिदानन्दघन परमात्मा, दृश्यवर्ग प्रकृति और पुरुष (जीवात्मा) उन चारोंके ज्ञानसे मुक्तिका कथन तथा परमात्मप्राप्तिके अन्य साधनोंका भी वर्णन  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  12.217.37 
विकारं प्रकृतिं चैव पुरुषं च सनातनम्।
यो यथावद् विजानाति स वितृष्णो विमुच्यते॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
जो पुरुष प्रकृति, उसके कार्य, आत्मा और सनातन परमात्मा को यथार्थ रूप से जानता है, वह कामनाओं से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त करता है ॥37॥
 
He who truly knows Nature, its functions, the soul and the eternal Supreme Being, becomes free from desires and attains salvation. ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)