Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.217.33: श्री हरि को अपने अन्तःकरण में विद्यमान जानकर वे अविनाशी हो जाते हैं। उन्हें पुनः इस संसार में आना नहीं पड़ता। उस अविनाशी एवं अपरिवर्तनीय परमपद को प्राप्त होकर वे परम आनन्द में लीन हो जाते हैं ॥ 33॥ | mahabharat अध्याय 12.217: सच्चिदानन्दघन परमात्मा, दृश्यवर्ग प्रकृति और पुरुष (जीवात्मा) उन चारोंके ज्ञानसे मुक्तिका कथन तथा परमात्मप्राप्तिके अन्य साधनोंका भी वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्री हरि को अपने अन्तःकरण में विद्यमान जानकर वे अविनाशी हो जाते हैं। उन्हें पुनः इस संसार में आना नहीं पड़ता। उस अविनाशी एवं अपरिवर्तनीय परमपद को प्राप्त होकर वे परम आनन्द में लीन हो जाते हैं ॥ 33॥
Knowing that Shri Hari is present in their inner beings, they become imperishable. They do not have to come to this world again. Having attained that imperishable and unchangeable supreme state, they become immersed in supreme bliss. ॥ 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥