Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.217.32: जो मनुष्य समस्त ऐश्वर्यों से युक्त, अजन्मा, दिव्य और अव्यक्त भगवान विष्णु की भक्तिपूर्वक शरण लेते हैं, वे ज्ञानरूपी आनन्द से तृप्त, शुद्ध और कामनाओं से रहित हो जाते हैं॥ 32॥ | mahabharat अध्याय 12.217: सच्चिदानन्दघन परमात्मा, दृश्यवर्ग प्रकृति और पुरुष (जीवात्मा) उन चारोंके ज्ञानसे मुक्तिका कथन तथा परमात्मप्राप्तिके अन्य साधनोंका भी वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भगवन्तमजं दिव्यं विष्णुमव्यक्तसंज्ञितम्।
भावेन यान्ति शुद्धा ये ज्ञानतृप्ता निराशिष:॥ ३२॥
अनुवाद
जो मनुष्य समस्त ऐश्वर्यों से युक्त, अजन्मा, दिव्य और अव्यक्त भगवान विष्णु की भक्तिपूर्वक शरण लेते हैं, वे ज्ञानरूपी आनन्द से तृप्त, शुद्ध और कामनाओं से रहित हो जाते हैं॥ 32॥
Those who surrender with devotion to Lord Vishnu, who is endowed with all opulences, is unborn, divine and unmanifest, become satisfied with the bliss of knowledge, pure and free from desires. ॥ 32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥