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mahabharat 12.217.31: जो लोग आसक्ति आदि दोषों से रहित होकर अनित्य ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं, वे भी उत्तम लोकों को प्राप्त होते हैं। तत्पश्चात् साधना के बल से पूर्ण ज्ञान प्राप्त करके मोक्ष प्राप्त करते हैं ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 12.217: सच्चिदानन्दघन परमात्मा, दृश्यवर्ग प्रकृति और पुरुष (जीवात्मा) उन चारोंके ज्ञानसे मुक्तिका कथन तथा परमात्मप्राप्तिके अन्य साधनोंका भी वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 217: सच्चिदानन्दघन परमात्मा, दृश्यवर्ग प्रकृति और पुरुष (जीवात्मा) उन चारोंके ज्ञानसे मुक्तिका कथन तथा परमात्मप्राप्तिके अन्य साधनोंका भी वर्णन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  12.217.31 
कषायवर्जितं ज्ञानं येषामुत्पद्यते चलम्।
यान्ति तेऽपि पराँल्लोकान् विमुच्यन्ते यथाबलम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
जो लोग आसक्ति आदि दोषों से रहित होकर अनित्य ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं, वे भी उत्तम लोकों को प्राप्त होते हैं। तत्पश्चात् साधना के बल से पूर्ण ज्ञान प्राप्त करके मोक्ष प्राप्त करते हैं ॥31॥
 
Those who get temporary knowledge free from defects like attachment etc. also reach the best worlds. Thereafter, by acquiring complete knowledge through the power of sadhana, they achieve salvation. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)