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mahabharat 12.217.30: वेदों को जानने वाले विद्वानों ने इस प्रकार धर्म को एकमात्र ब्रह्म की प्राप्ति का साधन बताया है। जो भक्त अपने ज्ञान के अनुसार उपासना करते हैं, वे सभी परम गति को प्राप्त होते हैं। 30॥   |   mahabharat अध्याय 12.217: सच्चिदानन्दघन परमात्मा, दृश्यवर्ग प्रकृति और पुरुष (जीवात्मा) उन चारोंके ज्ञानसे मुक्तिका कथन तथा परमात्मप्राप्तिके अन्य साधनोंका भी वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 217: सच्चिदानन्दघन परमात्मा, दृश्यवर्ग प्रकृति और पुरुष (जीवात्मा) उन चारोंके ज्ञानसे मुक्तिका कथन तथा परमात्मप्राप्तिके अन्य साधनोंका भी वर्णन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.217.30 
एवमेकायनं धर्ममाहुर्वेदविदो जना:।
यथाज्ञानमुपासन्त: सर्वे यान्ति परां गतिम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
वेदों को जानने वाले विद्वानों ने इस प्रकार धर्म को एकमात्र ब्रह्म की प्राप्ति का साधन बताया है। जो भक्त अपने ज्ञान के अनुसार उपासना करते हैं, वे सभी परम गति को प्राप्त होते हैं। 30॥
 
The learned men who know the Vedas have described religion as the means to attain the only Brahma in this way. All the devotees who worship according to their knowledge attain the supreme state. 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)