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mahabharat 12.217.28: उन महात्माओं के सूक्ष्म लक्षणों को शास्त्रीय दृष्टि से देखो। देह त्यागने के समय तक उस परम ब्रह्म का ज्ञान प्राप्त करना चाहिए जो नित्य मुक्त है, आसक्ति से रहित है, आकाश से भी अधिक अद्वितीय है, जिसमें योगाभ्यास द्वारा मन स्थित है। 28॥   |   mahabharat अध्याय 12.217: सच्चिदानन्दघन परमात्मा, दृश्यवर्ग प्रकृति और पुरुष (जीवात्मा) उन चारोंके ज्ञानसे मुक्तिका कथन तथा परमात्मप्राप्तिके अन्य साधनोंका भी वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 217: सच्चिदानन्दघन परमात्मा, दृश्यवर्ग प्रकृति और पुरुष (जीवात्मा) उन चारोंके ज्ञानसे मुक्तिका कथन तथा परमात्मप्राप्तिके अन्य साधनोंका भी वर्णन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  12.217.28 
सूक्ष्मं विशेषणं तेषामवेक्षेच्छास्त्रचक्षुषा।
देहान्तं परमं विद्याद् विमुक्तमपरिग्रहम्।
अन्तरिक्षादन्यतरं धारणासक्तमानसम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
उन महात्माओं के सूक्ष्म लक्षणों को शास्त्रीय दृष्टि से देखो। देह त्यागने के समय तक उस परम ब्रह्म का ज्ञान प्राप्त करना चाहिए जो नित्य मुक्त है, आसक्ति से रहित है, आकाश से भी अधिक अद्वितीय है, जिसमें योगाभ्यास द्वारा मन स्थित है। 28॥
 
Look at the subtle characteristics of those Mahatmas from the classical point of view. Till the time of leaving the body, one should attain the knowledge of that Supreme Brahma who is eternally free, free from attachment, more unique than the sky, in whom the mind is established through the practice of Yoga. 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)