Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.217.24: कुछ योगी अपनी बुद्धि के द्वारा अपने मन को सांसारिक वस्तुओं से हटा लेते हैं, तथा अपने शरीर को स्थिर मुद्रा में रखकर तथा इन्द्रियों की समस्त आसक्ति को त्यागकर अपनी सूक्ष्म बुद्धि के कारण ब्रह्म की उपासना करते हैं। | mahabharat अध्याय 12.217: सच्चिदानन्दघन परमात्मा, दृश्यवर्ग प्रकृति और पुरुष (जीवात्मा) उन चारोंके ज्ञानसे मुक्तिका कथन तथा परमात्मप्राप्तिके अन्य साधनोंका भी वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुछ योगी अपनी बुद्धि के द्वारा अपने मन को सांसारिक वस्तुओं से हटा लेते हैं, तथा अपने शरीर को स्थिर मुद्रा में रखकर तथा इन्द्रियों की समस्त आसक्ति को त्यागकर अपनी सूक्ष्म बुद्धि के कारण ब्रह्म की उपासना करते हैं।
Some Yogis, by means of their intellect, withdraw their mind from worldly objects, and by holding their body in a firm posture and by abandoning all attachment to the senses, worship Brahman because of their subtle intellect.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥