Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.217.23: जो ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर चुके हैं, वे प्रारब्ध के पीछे नहीं भागते, अर्थात् वे प्रारब्ध के बंधन से मुक्त हो जाते हैं। किन्तु जो विपरीत स्थिति में हैं, अर्थात् जिनका अज्ञान दूर नहीं हुआ है, वे प्रारब्ध के कारण जन्म-मरण के चक्र में फंसे रहते हैं॥ 23॥ | mahabharat अध्याय 12.217: सच्चिदानन्दघन परमात्मा, दृश्यवर्ग प्रकृति और पुरुष (जीवात्मा) उन चारोंके ज्ञानसे मुक्तिका कथन तथा परमात्मप्राप्तिके अन्य साधनोंका भी वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
परप्रत्ययसर्गे तु नियतिर्नानुवर्तते।
भावान्तप्रभवप्रज्ञा आसते ये विपर्ययम्॥ २३॥
अनुवाद
जो ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर चुके हैं, वे प्रारब्ध के पीछे नहीं भागते, अर्थात् वे प्रारब्ध के बंधन से मुक्त हो जाते हैं। किन्तु जो विपरीत स्थिति में हैं, अर्थात् जिनका अज्ञान दूर नहीं हुआ है, वे प्रारब्ध के कारण जन्म-मरण के चक्र में फंसे रहते हैं॥ 23॥
Those who have attained the knowledge of Brahman are not followed by destiny, i.e. they are freed from the bondage of destiny. But those who are in the opposite situation, i.e. those whose ignorance has not been dispelled, remain trapped in the cycle of birth and death due to destiny.॥ 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥