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mahabharat 12.217.20: इस प्रकार योग में तत्पर मन से प्राप्त होने वाले ज्ञान को जीवन के अंत तक पूरी चेष्टा करके धीरे-धीरे प्राप्त करना चाहिए। इस कार्य में धैर्य नहीं खोना चाहिए॥ 20॥   |   mahabharat अध्याय 12.217: सच्चिदानन्दघन परमात्मा, दृश्यवर्ग प्रकृति और पुरुष (जीवात्मा) उन चारोंके ज्ञानसे मुक्तिका कथन तथा परमात्मप्राप्तिके अन्य साधनोंका भी वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 217: सच्चिदानन्दघन परमात्मा, दृश्यवर्ग प्रकृति और पुरुष (जीवात्मा) उन चारोंके ज्ञानसे मुक्तिका कथन तथा परमात्मप्राप्तिके अन्य साधनोंका भी वर्णन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.217.20 
अन्तकाले बलोत्कर्षाच्छनै: कुर्यादनातुर:।
एवं युक्तेन मनसा ज्ञानं यदुपपद्यते॥ २०॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार योग में तत्पर मन से प्राप्त होने वाले ज्ञान को जीवन के अंत तक पूरी चेष्टा करके धीरे-धीरे प्राप्त करना चाहिए। इस कार्य में धैर्य नहीं खोना चाहिए॥ 20॥
 
In this way, the knowledge that is obtained by a mind immersed in yoga should be acquired gradually by putting in all one's efforts till the end of life. Patience should not be lost in this task.॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)