श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 217: सच्चिदानन्दघन परमात्मा, दृश्यवर्ग प्रकृति और पुरुष (जीवात्मा) उन चारोंके ज्ञानसे मुक्तिका कथन तथा परमात्मप्राप्तिके अन्य साधनोंका भी वर्णन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.217.18 
विधिज्ञेभ्यो द्विजातिभ्यो ग्राह्यमन्नं विशिष्यते।
आहारनियमेनास्य पाप्मा शाम्यति राजस:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वैदिक नियमों को जानने वाले तथा उनका पालन करने वाले ब्राह्मणों से ही भोजन ग्रहण करना उत्तम माना गया है। ऐसा भोजन नियमित रूप से करने से रजोगुण से उत्पन्न पाप शांत हो जाते हैं॥18॥
 
It is considered best to take food only from the Brahmins who know the Vedic rules and follow them. By eating such food regularly, the sins arising from Rajoguna are pacified.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)