Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.217.13: अतः इन कारणों से आवृत इन चार वस्तुओं (सच्चिदानन्दघन परमात्मा, दृश्य वर्ग, प्रकृति और पुरुष) को जानना चाहिए। इन वस्तुओं को भलीभाँति जानकर मनुष्य मृत्यु के समय मोह में नहीं पड़ता। 13॥ | mahabharat अध्याय 12.217: सच्चिदानन्दघन परमात्मा, दृश्यवर्ग प्रकृति और पुरुष (जीवात्मा) उन चारोंके ज्ञानसे मुक्तिका कथन तथा परमात्मप्राप्तिके अन्य साधनोंका भी वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्माच्चतुष्टयं वेद्यमेतैर्हेतुभिरावृतम्।
यथासंज्ञो ह्ययं सम्यगन्तकाले न मुह्यति॥ १३॥
अनुवाद
अतः इन कारणों से आवृत इन चार वस्तुओं (सच्चिदानन्दघन परमात्मा, दृश्य वर्ग, प्रकृति और पुरुष) को जानना चाहिए। इन वस्तुओं को भलीभाँति जानकर मनुष्य मृत्यु के समय मोह में नहीं पड़ता। 13॥
Therefore, these four things covered by these reasons (Sachchidanandaghan Paramatma, visible class, nature and man) should be known. By knowing these things well, man does not fall into illusion at the time of death. 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥