Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.217.11: प्रकृति और पुरुष के संयोग से चेतन और अचेतन जगत का जन्म होता है, जो कर्म से ही जाना जाता है। जीव मन और इन्द्रियों के द्वारा कर्म करता है। वह अपने द्वारा किए जाने वाले प्रत्येक कर्म का कर्ता कहलाता है। उसे 'कौन', 'मैं', 'यह' और 'वह' आदि शब्दों और संज्ञाओं द्वारा वर्णित किया जाता है।॥11॥ | mahabharat अध्याय 12.217: सच्चिदानन्दघन परमात्मा, दृश्यवर्ग प्रकृति और पुरुष (जीवात्मा) उन चारोंके ज्ञानसे मुक्तिका कथन तथा परमात्मप्राप्तिके अन्य साधनोंका भी वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रकृति और पुरुष के संयोग से चेतन और अचेतन जगत का जन्म होता है, जो कर्म से ही जाना जाता है। जीव मन और इन्द्रियों के द्वारा कर्म करता है। वह अपने द्वारा किए जाने वाले प्रत्येक कर्म का कर्ता कहलाता है। उसे 'कौन', 'मैं', 'यह' और 'वह' आदि शब्दों और संज्ञाओं द्वारा वर्णित किया जाता है।॥11॥
The union of nature and man gives birth to the animate and inanimate world, which is known only by action. The living being performs action through the mind and senses. He is called the doer of every action he performs. He is described by words and nouns like 'who', 'I', 'this' and 'that'.॥11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥