Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.217.10: वह स्वयं निर्गुण है और प्रकृति के परिवर्तन (कार्यों) का द्रष्टा है। ये प्रकृति और पुरुष दोनों ही पूर्णतः इन्द्रियों के विषय नहीं हैं। दोनों निराकार हैं और एक दूसरे से भिन्न हैं॥10॥ | mahabharat अध्याय 12.217: सच्चिदानन्दघन परमात्मा, दृश्यवर्ग प्रकृति और पुरुष (जीवात्मा) उन चारोंके ज्ञानसे मुक्तिका कथन तथा परमात्मप्राप्तिके अन्य साधनोंका भी वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह स्वयं निर्गुण है और प्रकृति के परिवर्तन (कार्यों) का द्रष्टा है। ये प्रकृति और पुरुष दोनों ही पूर्णतः इन्द्रियों के विषय नहीं हैं। दोनों निराकार हैं और एक दूसरे से भिन्न हैं॥10॥
He himself is devoid of qualities and is the observer of the changes (actions) of nature. Both these nature and man are not completely the objects of the senses. Both are formless and distinct from each other.॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥