अपने कर्मों के अनुसार यदि कोई सत्व, रज या तम आदि गुणों में से किसी को भी प्राप्त कर लेता है, तो मन पर जो भी संस्कार रह जाते हैं अथवा जब भी मन किसी कर्म से प्रसन्न होता है, उस समय सूक्ष्म तत्त्व स्वप्न में वैसा ही रूप प्रकट करते हैं।॥9॥
According to one's deeds, if one acquires any of the qualities like Sattva, Raja or Tama, then whatever impressions are left on the mind or whenever the mind is pleased by any act, at that time the subtle elements manifest similar forms in dreams.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥