संस्काराणामसंख्यानां कामात्मा तदवाप्नुयात्।
मनस्यन्तर्हितं सर्वं स वेदोत्तमपूरुष:॥ ८॥
अनुवाद
जिसका मन कामनाओं में लीन रहता है, वह स्वप्न में असंख्य संस्कारों के अनुसार अनेक दृश्य देखता है। वे सभी संस्कार उसके मन में छिपे रहते हैं, जिन्हें सबमें श्रेष्ठ जानने वाला परमेश्वर जानता है॥8॥
The person whose mind is engrossed in desires, sees many scenes in his dreams according to innumerable impressions. All those impressions remain hidden in his mind, which the Supreme Being, who is the best knower of all, knows.॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥