श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 216: स्वप्न और सुषुप्ति-अवस्थामें मनकी स्थिति तथा गुणातीत ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.216.7 
कार्ये व्यासक्तमनस: संकल्पो जाग्रतो ह्यपि।
यद्वन्मनोरथैश्वर्यं स्वप्ने तद्वन्मनोगतम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार जाग्रत अवस्था में विविध कार्यों में लगे हुए मनुष्य के विचार मन की अभिव्यक्ति होते हैं, उसी प्रकार स्वप्न की अनुभूतियाँ भी मन से संबंधित होती हैं ॥7॥
 
Just as the thoughts of a person engaged in various activities in the waking state are a manifestation of the mind, similarly the feelings of dreams too are related to the mind. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)