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mahabharat 12.216.3: मनुष्य पहले ज्ञान का अभ्यास करके जागते रहने की आदत डालता है, फिर विचार करने के लिए जागते रहना अनिवार्य हो जाता है और जो तत्वज्ञान को प्राप्त हो जाता है, वह ब्रह्म में निरन्तर जागता रहता है ॥3॥   |   mahabharat अध्याय 12.216: स्वप्न और सुषुप्ति-अवस्थामें मनकी स्थिति तथा गुणातीत ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 216: स्वप्न और सुषुप्ति-अवस्थामें मनकी स्थिति तथा गुणातीत ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.216.3 
ज्ञानाभ्यासाज्जागरणं जिज्ञासार्थमनन्तरम्।
विज्ञानाभिनिवेशात्तु स जागर्त्यनिशं सदा॥ ३॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य पहले ज्ञान का अभ्यास करके जागते रहने की आदत डालता है, फिर विचार करने के लिए जागते रहना अनिवार्य हो जाता है और जो तत्वज्ञान को प्राप्त हो जाता है, वह ब्रह्म में निरन्तर जागता रहता है ॥3॥
 
Man first develops the habit of staying awake by practicing knowledge, then it becomes mandatory to stay awake for thinking and the one who attains Tatvgyan remains continuously awake in Brahma. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)