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mahabharat 12.216.20: ज्ञानमय दृष्टि वाले महापुरुष ही ब्रह्म के विषय में तर्कपूर्ण बातें कह सकते हैं अथवा मन और इन्द्रियों को विषयों से हटाकर एकाग्रतापूर्वक विचार करने से भी ब्रह्म का साक्षात्कार हो सकता है ॥20॥   |   mahabharat अध्याय 12.216: स्वप्न और सुषुप्ति-अवस्थामें मनकी स्थिति तथा गुणातीत ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 216: स्वप्न और सुषुप्ति-अवस्थामें मनकी स्थिति तथा गुणातीत ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.216.20 
हेतुमच्छक्यमाख्यातुमेतावज्ज्ञानचक्षुषा।
प्रत्याहारेण वा शक्यमक्षरं ब्रह्म वेदितुम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
ज्ञानमय दृष्टि वाले महापुरुष ही ब्रह्म के विषय में तर्कपूर्ण बातें कह सकते हैं अथवा मन और इन्द्रियों को विषयों से हटाकर एकाग्रतापूर्वक विचार करने से भी ब्रह्म का साक्षात्कार हो सकता है ॥20॥
 
Only great men with knowledgeable vision can say logical things about Brahma or by removing the mind and senses from the objects and thinking with concentration, one can also realize Brahma. 20॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि वार्ष्णेयाध्यात्मकथने षोडशाधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २१६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें श्रीकृष्णसम्बन्धी अध्यात्मका कथनविषयक दो सौ सोलहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २१६॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)