हेतुमच्छक्यमाख्यातुमेतावज्ज्ञानचक्षुषा।
प्रत्याहारेण वा शक्यमक्षरं ब्रह्म वेदितुम्॥ २०॥
अनुवाद
ज्ञानमय दृष्टि वाले महापुरुष ही ब्रह्म के विषय में तर्कपूर्ण बातें कह सकते हैं अथवा मन और इन्द्रियों को विषयों से हटाकर एकाग्रतापूर्वक विचार करने से भी ब्रह्म का साक्षात्कार हो सकता है ॥20॥
Only great men with knowledgeable vision can say logical things about Brahma or by removing the mind and senses from the objects and thinking with concentration, one can also realize Brahma. 20॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि वार्ष्णेयाध्यात्मकथने षोडशाधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २१६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें श्रीकृष्णसम्बन्धी अध्यात्मका कथनविषयक दो सौ सोलहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २१६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥