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mahabharat 12.216.2: स्वप्न में जीवात्मा प्रायः रजोगुण और तमोगुण से दबा रहता है। कामनाओं से भरा हुआ वह इस प्रकार विचरण करता है मानो उसने दूसरा शरीर धारण कर लिया हो।॥2॥   |   mahabharat अध्याय 12.216: स्वप्न और सुषुप्ति-अवस्थामें मनकी स्थिति तथा गुणातीत ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 216: स्वप्न और सुषुप्ति-अवस्थामें मनकी स्थिति तथा गुणातीत ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.216.2 
स्वप्ने हि रजसा देही तमसा चाभिभूयते।
देहान्तरमिवापन्नश्चरत्युपगतस्पृह:॥ २॥
 
 
अनुवाद
स्वप्न में जीवात्मा प्रायः रजोगुण और तमोगुण से दबा रहता है। कामनाओं से भरा हुआ वह इस प्रकार विचरण करता है मानो उसने दूसरा शरीर धारण कर लिया हो।॥2॥
 
In dreams, the soul is often suppressed by the Rajoguna and Tamoguna. Filled with desires, it wanders about as if it has acquired another body.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)