Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.216.19: ब्रह्म इन सब गुणों से परे, अक्षर, अमृत, आत्म-प्रकाश और ज्ञानस्वरूप है। जो शुद्ध अंतःकरण वाले संत उसे जानते हैं, वे परमपद को प्राप्त करते हैं। 19॥ | mahabharat अध्याय 12.216: स्वप्न और सुषुप्ति-अवस्थामें मनकी स्थिति तथा गुणातीत ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्रह्म इन सब गुणों से परे, अक्षर, अमृत, आत्म-प्रकाश और ज्ञानस्वरूप है। जो शुद्ध अंतःकरण वाले संत उसे जानते हैं, वे परमपद को प्राप्त करते हैं। 19॥
Brahma is beyond all these qualities, form of letter, nectar, self-light and knowledge. Those saints with pure conscience who know Him, attain the supreme state. 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥