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mahabharat 12.216.18: सत्व, रजोगुण और तमोगुण देवताओं और दैत्यों के गुण माने गए हैं। इनमें से सत्व देवताओं का गुण है और शेष दैत्यों के गुण हैं॥18॥   |   mahabharat अध्याय 12.216: स्वप्न और सुषुप्ति-अवस्थामें मनकी स्थिति तथा गुणातीत ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 216: स्वप्न और सुषुप्ति-अवस्थामें मनकी स्थिति तथा गुणातीत ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.216.18 
सत्त्वं रजस्तमश्चेति देवासुरगुणान् विदु:।
सत्त्वं देवगुणं विद्यादितरावासुरौ गुणौ॥ १८॥
 
 
अनुवाद
सत्व, रजोगुण और तमोगुण देवताओं और दैत्यों के गुण माने गए हैं। इनमें से सत्व देवताओं का गुण है और शेष दैत्यों के गुण हैं॥18॥
 
Sattva, Rajoguna and Tamoguna are considered to be the qualities of the gods and demons. Of these, Sattva is the quality of the gods and the rest are the qualities of the demons.॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)