श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 216: स्वप्न और सुषुप्ति-अवस्थामें मनकी स्थिति तथा गुणातीत ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.216.13 
व्यापकं सर्वभूतेषु वर्ततेऽप्रतिघं मन:।
आत्मप्रभावात् तं विद्यात् सर्वा ह्यात्मनि देवता:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
मन की सर्वत्र अबाध गति है। वह अपने अधिष्ठान-भूतात्मा के प्रभाव से समस्त प्राणियों में विद्यमान है; अतः आत्मा को अवश्य जानना चाहिए; क्योंकि समस्त देवता आत्मा में ही निवास करते हैं। 13॥
 
There is uninterrupted movement of the mind everywhere. He is present in all the beings due to the influence of his adhishthan-ghost soul; Therefore the soul must be known; Because all the gods reside in the soul only. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)