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mahabharat 12.216.12: जाग्रत अवस्था में प्रसन्न इन्द्रियों के द्वारा मनुष्य अपने मन में जो संकल्प करता है, स्वप्न अवस्था में आने पर भी उसका मन प्रसन्नतापूर्वक उसी संकल्प को पूरा होते हुए देखता है ॥12॥   |   mahabharat अध्याय 12.216: स्वप्न और सुषुप्ति-अवस्थामें मनकी स्थिति तथा गुणातीत ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 216: स्वप्न और सुषुप्ति-अवस्थामें मनकी स्थिति तथा गुणातीत ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  12.216.12 
प्रसन्नैरिन्द्रियैर्यद् यत् संकल्पयति मानसम्।
तत् तत् स्वप्नेऽप्युपगते मनो हृष्यन्निरीक्षते॥ १२॥
 
 
अनुवाद
जाग्रत अवस्था में प्रसन्न इन्द्रियों के द्वारा मनुष्य अपने मन में जो संकल्प करता है, स्वप्न अवस्था में आने पर भी उसका मन प्रसन्नतापूर्वक उसी संकल्प को पूरा होते हुए देखता है ॥12॥
 
Whatever resolution a person makes in his mind through happy senses during the waking state, even when he comes to the dream state, his mind happily sees the same resolution being fulfilled. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)