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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 216: स्वप्न और सुषुप्ति-अवस्थामें मनकी स्थिति तथा गुणातीत ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय
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श्लोक 10
श्लोक
12.216.10
ततस्तमुपसर्पन्ति गुणा राजसतामसा:।
सात्त्विका वा यथायोगमानन्तर्यफलोदयम्॥ १०॥
अनुवाद
उस स्वप्न के देखते ही सात्त्विक, राजस या तामस गुण उसके पास आकर उसे इच्छित सुख-दुःख का अनुभव कराते हैं ॥10॥
As soon as that dream is seen, the Sattvik, Rajas or Tamas qualities come to him to make him experience the desired happiness and sorrow. 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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