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mahabharat 12.215.6: अहिंसा, सत्य बोलना, सब प्राणियों के प्रति सरल व्यवहार, क्षमा और प्रमाद - ये गुण जिस मनुष्य में हैं, वही सुखी है ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 12.215: आसक्ति छोड़कर सनातन ब्रह्मकी प्राप्तिके लिये प्रयत्न करनेका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 215: आसक्ति छोड़कर सनातन ब्रह्मकी प्राप्तिके लिये प्रयत्न करनेका उपदेश  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.215.6 
अहिंसा सत्यवचनं सर्वभूतेषु चार्जवम्।
क्षमा चैवाप्रमादश्च यस्यैते स सुखी भवेत्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
अहिंसा, सत्य बोलना, सब प्राणियों के प्रति सरल व्यवहार, क्षमा और प्रमाद - ये गुण जिस मनुष्य में हैं, वही सुखी है ॥6॥
 
Non-violence, speaking truth, simple behavior towards all living beings, forgiveness and carelessness - only the man who has these qualities is happy. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)