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mahabharat 12.215.24: एक बार साधना शुरू कर दी तो उसे बीच में मत रोकिए। जिस प्रकार अग्नि को धीरे-धीरे तीव्र किया जाता है, उसी प्रकार ज्ञान की साधना को भी धीरे-धीरे प्रज्वलित करना चाहिए। ऐसा करने से ज्ञान सूर्य की तरह चमकने लगता है।   |   mahabharat अध्याय 12.215: आसक्ति छोड़कर सनातन ब्रह्मकी प्राप्तिके लिये प्रयत्न करनेका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 215: आसक्ति छोड़कर सनातन ब्रह्मकी प्राप्तिके लिये प्रयत्न करनेका उपदेश  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  12.215.24 
प्रवृत्तं नोपरुन्धेत शनैरग्निमिवेन्धयेत्।
ज्ञानान्वितं तथा ज्ञानमर्कवत् सम्प्रकाशते॥ २४॥
 
 
अनुवाद
एक बार साधना शुरू कर दी तो उसे बीच में मत रोकिए। जिस प्रकार अग्नि को धीरे-धीरे तीव्र किया जाता है, उसी प्रकार ज्ञान की साधना को भी धीरे-धीरे प्रज्वलित करना चाहिए। ऐसा करने से ज्ञान सूर्य की तरह चमकने लगता है।
 
Once you have started the sadhana, do not stop it in between. Just as the fire is gradually intensified, in the same way the sadhana of knowledge should be gradually stimulated. By doing this, knowledge starts shining like the sun.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)