Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.215.2: यह संसार जन्म, मृत्यु और वृद्धावस्था के दुःखों, नाना प्रकार के रोगों और मानसिक चिंताओं से भरा हुआ है; ऐसा समझकर बुद्धिमान मनुष्य को केवल मोक्ष के लिए ही प्रयत्न करना चाहिए॥2॥   |   mahabharat अध्याय 12.215: आसक्ति छोड़कर सनातन ब्रह्मकी प्राप्तिके लिये प्रयत्न करनेका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 215: आसक्ति छोड़कर सनातन ब्रह्मकी प्राप्तिके लिये प्रयत्न करनेका उपदेश  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.215.2 
जन्ममृत्युजरादु:खैर्व्याधिभिर्मानसक्लमै:।
दृष्ट्वैव संततं लोकं घटेन्मोक्षाय बुद्धिमान्॥ २॥
 
 
अनुवाद
यह संसार जन्म, मृत्यु और वृद्धावस्था के दुःखों, नाना प्रकार के रोगों और मानसिक चिंताओं से भरा हुआ है; ऐसा समझकर बुद्धिमान मनुष्य को केवल मोक्ष के लिए ही प्रयत्न करना चाहिए॥2॥
 
This world is filled with the sorrows of birth, death and old age, various types of diseases and mental worries; Understanding this, an intelligent man should strive only for salvation. 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)