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mahabharat 12.215.19: इस प्रकार जिस पुरुष ने अपनी इन्द्रियों को वश में कर लिया है और अपने मन को अपने वश में कर लिया है, उस अवस्था में उसकी इन्द्रियों के अधिष्ठाता देवता प्रसन्नता से चमकने लगते हैं और वे भगवान् की ओर उन्मुख हो जाते हैं॥19॥   |   mahabharat अध्याय 12.215: आसक्ति छोड़कर सनातन ब्रह्मकी प्राप्तिके लिये प्रयत्न करनेका उपदेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 215: आसक्ति छोड़कर सनातन ब्रह्मकी प्राप्तिके लिये प्रयत्न करनेका उपदेश  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.215.19 
निगृहीतेन्द्रियस्यास्य कुर्वाणस्य मनो वशे।
देवतास्तत् प्रकाशन्ते हृष्टा यान्ति तमीश्वरम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार जिस पुरुष ने अपनी इन्द्रियों को वश में कर लिया है और अपने मन को अपने वश में कर लिया है, उस अवस्था में उसकी इन्द्रियों के अधिष्ठाता देवता प्रसन्नता से चमकने लगते हैं और वे भगवान् की ओर उन्मुख हो जाते हैं॥19॥
 
In this way, a person who has subdued his senses and brought his mind under his control, in that state the presiding deities of his senses start glowing with happiness and they turn towards God.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)