श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 215: आसक्ति छोड़कर सनातन ब्रह्मकी प्राप्तिके लिये प्रयत्न करनेका उपदेश  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.215.18 
धृतिमानात्मवान् बुद्धिं निगृह्णीयादसंशयम्।
मनो बुद्धॺा निगृह्णीयाद् विषयान्मनसाऽऽत्मन:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान और धैर्यवान पुरुष को चाहिए कि वह अपनी बुद्धि को अवश्य वश में रखे; फिर बुद्धि के द्वारा मन को वश में रखे और मन के द्वारा अपनी इन्द्रियों को विषयों से वश में रखे ॥18॥
 
An intelligent and patient man should definitely control his intellect; Then control your mind through your intellect and control your senses through your mind from the objects. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)