श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 214: ब्रह्मचर्य तथा वैराग्यसे मुक्ति  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.214.23 
महर्षिर्भगवानत्रिर्वेद तच्छ्रुक्रसम्भवम्।
त्रिबीजमिन्द्रदैवत्यं तस्मादिन्द्रियमुच्यते॥ २३॥
 
 
अनुवाद
भगवान महर्षि अत्रि वीर्य की उत्पत्ति और गति को जानते हैं और कहते हैं कि मन का आवेग, संकल्प और भोजन, ये वीर्य के तीन कारण हैं। इस वीर्य के देवता इन्द्र हैं, इसलिए इसे इन्द्रिय कहते हैं॥23॥
 
Lord Maharishi Atri knows the origin and movement of semen and says that the mental impulse, resolution and food are the three causes of semen. The deity of this semen is Indra; hence it is called sense organ.॥23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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