श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 214: ब्रह्मचर्य तथा वैराग्यसे मुक्ति  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.214.19 
मध्ये च हृदयस्यैका शिरा तत्र मनोवहा।
शुक्रं संकल्पजं नॄणां सर्वगात्रैर्विमुञ्चति॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हृदय के मध्य में मनोवाह नामक नाड़ी होती है जो पुरुषों के काम-संकल्प द्वारा वीर्य को शरीर से बाहर खींचती है ॥19॥
 
In the centre of the heart there is a nerve called Manovaha which draws out the semen from the body through the sexual resolve of men. ॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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