श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 214: ब्रह्मचर्य तथा वैराग्यसे मुक्ति  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  12.214.12 
योषितां न कथा श्राव्या न निरीक्ष्या निरम्बरा:।
कथञ्चिद् दर्शनादासां दुर्बलानां विशेद्रज:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
स्त्रियों की चर्चा मत सुनो, उन्हें नग्न अवस्था में मत देखो; क्योंकि यदि संयोगवश उन्हें नग्न अवस्था में देख लिया जाए, तो दुर्बल हृदय वाले पुरुषों के मन में रजोगुण - आसक्ति या काम उत्पन्न हो जाता है ॥12॥
 
Do not listen to discussions of women. Do not see them naked; because if by any chance one sees them naked, the Rajoguna (passion) - attachment or lust enters the mind of weak-hearted men. ॥12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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