Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.214.11: ब्रह्मचर्य का पालन करना बहुत कठिन है। इसका उपाय मुझसे सुनो। ब्राह्मण को चाहिए कि जब रजोगुण की प्रवृत्ति प्रकट होने लगे और बढ़ने लगे, तब उसे रोक दे। 11. | mahabharat अध्याय 12.214: ब्रह्मचर्य तथा वैराग्यसे मुक्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सुदुष्करं ब्रह्मचर्यमुपायं तत्र मे शृणु।
सम्प्रदीप्तमुदीर्णं च निगृह्णीयाद् द्विजो रज:॥ ११॥
अनुवाद
ब्रह्मचर्य का पालन करना बहुत कठिन है। इसका उपाय मुझसे सुनो। ब्राह्मण को चाहिए कि जब रजोगुण की प्रवृत्ति प्रकट होने लगे और बढ़ने लगे, तब उसे रोक दे। 11.
It is very difficult to observe celibacy. Listen to me about the remedy for it. A Brahmin should stop the Rajoguna tendency when it starts appearing and increasing. 11.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥