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श्लोक 12.214.1  |
भीष्म उवाच
अत्रोपायं प्रवक्ष्यामि यथावच्छास्त्रचक्षुषा।
तत्त्वज्ञानाच्चरन् राजन् प्राप्नुयात्परमां गतिम्॥ १॥ |
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| अनुवाद |
| भीष्मजी कहते हैं - राजन ! अब मैं तुम्हें शास्त्रविधि से मोक्ष प्राप्ति का उचित उपाय बताता हूँ। शास्त्रविधि से कर्मकाण्ड करके निष्काम भाव से मनुष्य तत्वज्ञान द्वारा परम गति को प्राप्त होता है। 1॥ |
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| Bhishmaji says – King! Now let me tell you the correct solution for salvation from the scriptures. By performing the rituals prescribed in the scriptures selflessly, a person attains the ultimate goal through the knowledge of philosophy. 1॥ |
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