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mahabharat 12.211.6: आत्मा सभी से पहले से विद्यमान है। यह नित्य, सर्वव्यापी और कारण-निर्गुण है। यह समस्त जगत्, जो कारणात्मक है, अज्ञान का कार्य कहा गया है।   |   mahabharat अध्याय 12.211: संसारचक्र और जीवात्माकी स्थितिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 211: संसारचक्र और जीवात्माकी स्थितिका वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.211.6 
पूर्वं नित्यं सर्वगतं मनोहेतुमलक्षणम्।
अज्ञानकर्म निर्दिष्टमेतत् कारणलक्षणम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
आत्मा सभी से पहले से विद्यमान है। यह नित्य, सर्वव्यापी और कारण-निर्गुण है। यह समस्त जगत्, जो कारणात्मक है, अज्ञान का कार्य कहा गया है।
 
The soul existed before everything else. It is eternal, omnipresent and without cause or characteristics. This entire world, which is causal, is said to be the work of ignorance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)