Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.211.5: पहले पृथ्वी, आकाश, स्वर्ग, भूत, ऋषि, देवता और राक्षस कुछ भी नहीं थे। चेतन के अतिरिक्त किसी वस्तु का अस्तित्व नहीं था। चेतन और जड़ का कोई संयोग नहीं था। ॥5॥ | mahabharat अध्याय 12.211: संसारचक्र और जीवात्माकी स्थितिका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न भूर्न खं द्यौर्भूतानि नर्षयो न सुरासुरा:।
नान्यदासीदृते जीवमासेदुर्न तु संहतम्॥ ५॥
अनुवाद
पहले पृथ्वी, आकाश, स्वर्ग, भूत, ऋषि, देवता और राक्षस कुछ भी नहीं थे। चेतन के अतिरिक्त किसी वस्तु का अस्तित्व नहीं था। चेतन और जड़ का कोई संयोग नहीं था। ॥5॥
Earlier, there was no earth, sky, heaven, ghosts, sages, gods and demons. There was no existence of anything other than the conscious. There was no combination of the conscious and the inanimate. ॥5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥