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mahabharat 12.211.17: जैसे अग्नि में भूने हुए बीज उगते नहीं, वैसे ही जब ज्ञानरूपी अग्नि से अज्ञानरूपी समस्त क्लेश भस्म हो जाते हैं, तब आत्मा को इस संसार में पुनः जन्म नहीं लेना पड़ता ॥17॥   |   mahabharat अध्याय 12.211: संसारचक्र और जीवात्माकी स्थितिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 211: संसारचक्र और जीवात्माकी स्थितिका वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.211.17 
बीजान्यग्न्युपदग्धानि न रोहन्ति यथा पुन:।
ज्ञानदग्धैस्तथा क्लेशैर्नात्मा सम्पद्यते पुन:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जैसे अग्नि में भूने हुए बीज उगते नहीं, वैसे ही जब ज्ञानरूपी अग्नि से अज्ञानरूपी समस्त क्लेश भस्म हो जाते हैं, तब आत्मा को इस संसार में पुनः जन्म नहीं लेना पड़ता ॥17॥
 
Just as seeds roasted in fire do not grow, in the same way, when all the troubles of ignorance are burnt by the fire of knowledge, the soul does not have to take birth again in this world. 17॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि वार्ष्णेयाध्यात्मकथने एकादशाधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २११॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें श्रीकृष्णसम्बन्धी अध्यात्मका कथनविषयक दो सौ ग्यारहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २११॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)