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mahabharat 12.211.16: (भीष्मजी कहते हैं-) इस प्रकार महाज्ञानी भगवान गुरुदेव ने शिष्य के मन में उत्पन्न हुए इस संशय का निवारण किया। अतः विद्वान् व्यक्ति को ऐसे उपायों पर दृष्टि रखनी चाहिए, जो कर्म द्वारा उद्देश्य की प्राप्ति में सहायक हों॥16॥   |   mahabharat अध्याय 12.211: संसारचक्र और जीवात्माकी स्थितिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 211: संसारचक्र और जीवात्माकी स्थितिका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.211.16 
संदेहमेतमुत्पन्नमच्छिनद् भगवानृषि:।
तथा वार्तां समीक्षेत कृतलक्षणसम्मिताम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
(भीष्मजी कहते हैं-) इस प्रकार महाज्ञानी भगवान गुरुदेव ने शिष्य के मन में उत्पन्न हुए इस संशय का निवारण किया। अतः विद्वान् व्यक्ति को ऐसे उपायों पर दृष्टि रखनी चाहिए, जो कर्म द्वारा उद्देश्य की प्राप्ति में सहायक हों॥16॥
 
(Bhishmaji says-) In this way the great sage Bhagwan Gurudev removed this doubt that arose in the disciple. Therefore the learned person should keep an eye on such methods, which help in achieving the objective through action.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)