Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.211.15: अतः बुद्धिमान पुरुष को क्षेत्र और क्षेत्रज्ञान का भेद जानना चाहिए। इन दोनों के बीच तादात्म्य के अभ्यास के कारण जीव ऐसा हो गया है कि उसे अपने शुद्ध स्वरूप का बोध नहीं होता। 15॥ | mahabharat अध्याय 12.211: संसारचक्र और जीवात्माकी स्थितिका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तथैतदन्तरं विद्यात् सत्त्वक्षेत्रज्ञयोर्बुध:।
अभ्यासात् स तथा युक्तो न गच्छेत् प्रकृतिं पुन:॥ १५॥
अनुवाद
अतः बुद्धिमान पुरुष को क्षेत्र और क्षेत्रज्ञान का भेद जानना चाहिए। इन दोनों के बीच तादात्म्य के अभ्यास के कारण जीव ऐसा हो गया है कि उसे अपने शुद्ध स्वरूप का बोध नहीं होता। 15॥
Therefore, a wise man should know the difference between Kshetra and Kshetragyana. Due to the practice of identification between these two, the living being has become such that it does not realize its pure form. 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥