Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.210.27: अव्यक्त प्रकृति में विक्षोभ होने पर जो बुद्धि (महत्तत्त्व) उत्पन्न होती है, वह अहंकार को जन्म देती है। अहंकार से आकाश उत्पन्न होता है और आकाश से वायु उत्पन्न होती है। 27॥ | mahabharat अध्याय 12.210: गुरु-शिष्यके संवादका उल्लेख करते हुए श्रीकृष्ण-सम्बन्धी अध्यात्मतत्त्वका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अव्यक्त प्रकृति में विक्षोभ होने पर जो बुद्धि (महत्तत्त्व) उत्पन्न होती है, वह अहंकार को जन्म देती है। अहंकार से आकाश उत्पन्न होता है और आकाश से वायु उत्पन्न होती है। 27॥
The intelligence (mahattattva) that arises when there is disturbance in the unmanifested nature, gives birth to ego. Sky is born from ego and air is born from sky. 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥