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mahabharat 12.210.16: इसी प्रकार प्रलय काल के समाप्त होने पर कल्प के प्रारंभ में भगवान श्रीकृष्ण स्वयं प्रकृति का आश्रय लेकर पुनः वेद, शास्त्र और सनातन लोकधर्मों को प्रकट करते हैं॥ 16॥   |   mahabharat अध्याय 12.210: गुरु-शिष्यके संवादका उल्लेख करते हुए श्रीकृष्ण-सम्बन्धी अध्यात्मतत्त्वका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.210.16 
तथैव वेदशास्त्राणि लोकधर्मांश्च शाश्वतान्।
प्रलयं प्रकृतिं प्राप्य युगादौ सृजते पुन:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार प्रलय काल के समाप्त होने पर कल्प के प्रारंभ में भगवान श्रीकृष्ण स्वयं प्रकृति का आश्रय लेकर पुनः वेद, शास्त्र और सनातन लोकधर्मों को प्रकट करते हैं॥ 16॥
 
Similarly, after the end of the Pralaya period, at the beginning of the Kalpa, Lord Krishna himself, taking shelter of Nature, reveals the Vedas, scriptures and the eternal folk religions once again.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)