श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 21: देवस्थान मुनिके द्वारा युधिष्ठिरके प्रति उत्तम धर्मका और यज्ञादि करनेका उपदेश  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  12.21.9-10h 
केचित् सर्वं परित्यज्य तूष्णीं ध्यायन्त आसते।
राज्यमेके प्रशंसन्ति प्रजानां परिपालनम्॥ ९॥
हत्वा छित्त्वा च भित्त्वा च केचिदेकान्तशीलिन:।
 
 
अनुवाद
कुछ लोग सब कुछ छोड़कर चुपचाप भगवान् के ध्यान में लगे रहते हैं और कुछ लोग शत्रु सेना का नाश करके तथा राज्य प्राप्त करके प्रजा की रक्षा का धर्म बताते हैं और कुछ लोग एकान्त में रहकर आत्मचिंतन करना पसन्द करते हैं ॥91/2॥
 
Some, leaving aside everything, remain quietly engaged in the meditation of God; and some, after killing and destroying the enemy's army and gaining the kingdom, praise the religion of protecting the subjects; and others prefer to stay in solitude and introspect. ॥91/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)