Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.21.6: हे कुन्तीपुत्र! जब सभी प्राणी एक-एक धर्म का पालन समान रीति से करते हैं, तब वे स्वयं अपनी आत्मा के द्वारा परमात्मा को प्राप्त करते हैं; अतः हे भरतपुत्र! इस समय अपने कर्तव्य को समझो॥6॥ | mahabharat अध्याय 12.21: देवस्थान मुनिके द्वारा युधिष्ठिरके प्रति उत्तम धर्मका और यज्ञादि करनेका उपदेश । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं कौन्तेय भूतानि तं तं धर्मं तथा तथा।
तदाऽऽत्मना प्रपश्यन्ति तस्माद् बुद्धॺस्व भारत॥ ६॥
अनुवाद
हे कुन्तीपुत्र! जब सभी प्राणी एक-एक धर्म का पालन समान रीति से करते हैं, तब वे स्वयं अपनी आत्मा के द्वारा परमात्मा को प्राप्त करते हैं; अतः हे भरतपुत्र! इस समय अपने कर्तव्य को समझो॥6॥
Kunti's son! When all living beings follow each religion in the same way, then they themselves realize the Supreme Soul through their own souls; therefore, Bharat's son! At this time, understand your duty. ॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥